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🌟 हौसलों की उड़ान 🌟

जो चल पड़े सवेरा देख, हर राह नहीं वो पाए, जो ठान ले इरादा पक्का, मंज़िल वही तो लाए। हर तेज़ उड़ान का मतलब, मंज़िल पाना नहीं होता, जो धरती से जुड़ा रहे, वही आसमान की ऊँचाई छूता। जो थक कर बैठ जाए, वो रुकावट में खो जाए, जो दृढ़ संकल्प रखे दिल में, वही सीतारा बन जाए। वक़्त से पहले जागना ही समझदारी की बात नहीं, धैर्य से जो खेले बाज़ी, हार उसकी औकात नहीं। कई बार देर से चलने वाला, सबसे आगे मिलता है, जो जुनून से जले अंदर, वही दीपक बन जाता है। जीत उसी की होती है जो, हालातों से ना घबराए, वक़्त, मेहनत और जज़्बा, जब साथ चले — कमाल दिखाए। ✨🔥 — ✍️ आशुतोष पाणिग्राही।

उम्मीदों की शाम

उम्मीदों की शाम **************** सोमवार की शाम कुछ थकी-थकी सी है, रात की चादर में सिमटी हुई सी है, दिनभर की दौड़ में उलझे हुए हैं हम, पर उम्मीदों की लौ अब भी जली हुई सी है। शहर की रौशनी में हल्की खामोशी है, दिल में कहीं थोड़ी सी बेकरारी सी है, सपने जो सुबह के संग देखे थे हमने, वो अब भी निगाहों में जागी हुई सी है। शाम की ठंडक में सुकून थोड़ा है, कल की सुबह का ख्याल अभी ज़िंदा है, सोचते हैं कि थकान मिटा लें आज की, क्योंकि हर दिन के साथ एक नया सपना है। शुभ संध्या #शुभ_संध्या #GoodEvening

ट्विटर की कहानी: विचार और व्यंग्य की धारा

  ओह, ट्विटर, विवाद और चालाकी का स्थान, 🎭 जहाँ प्रत्येक ट्वीट वायु में गुज़रने का एक मौका है। 💨 ज्ञान का मंच, ओह इतना गहरा, 📚 जहाँ बुद्धिमत्ता की उन्नति होती है, या ऐसा हमें कहते हैं। 👑 लेकिन अलस, यह एक सर्कस, एक पगले का मेला है, 🎪 जहाँ तार्किकता और युक्तिवाद धीरे-धीरे गायब होता है। 💭 एक अहंकार के मैदान, जो संघर्ष के लिए तैयार है, ⚔️ 280 अक्षरों में, हम बार घटाते हैं। 📉 ओह, कैसे हम पसंद करते हैं ट्वीट और बदलते हैं, 💬 इस डिजिटल विश्व में, जहाँ भावनाएँ फ्लिकर करती हैं। 💥 जहाँ ट्रोल्स मुक्त हैं, किसी भी शर्म के बिना, 🧟‍♂️ और हैशटैग ट्रेंड, एक आग की तरह फैलता है। 🔥 तो यहाँ है ट्विटर, मज़ाक का पराकाष्ठा, 🥂 जहाँ चालाकी की राजनीति परीक्षण में है। 😏 जोखिम के इस क्षेत्र में, जहाँ सच्चाई है धुंधली, 🌀 हम इस अद्भुत ट्विटरवर्स में ट्वीट करते हैं। 🐦 #ट्विटर_कविता #विवाद_मेला #हास्य_नगरी #ट्वीट_संसार #भावनात्मक_आतिशबाजी #हैशटैग_उल्लास

रहस्यमयी कलम: प्रेम की कहानी

कलम एक ऐसा साथी है जो हमेशा हमारे साथ होती है, हमारे अंतर के जज़्बातों को व्यक्त करने का साधन है। यह वह रहस्यमय जगह है जहां हर बात अनवरत बदलती है और हर बार नए इंजाम लेती है। कलम की कहानी एक प्रेम कहानी की तरह है , जो शब्दों के जादू से सजीव होती है। यह वह साकार रूप है जिससे हम अपने अंतर मन की गहराईयों तक पहुँच सकते हैं, बिना किसी रोकटोक के। हर शब्द एक नई दुनिया का दरवाजा खोलता है, जो हमें अपने आत्मा की सौंदर्य और भावनाओं के साथ मिलता है। कलम की परीक्षा में हम अपनी सबसे गहरी और सबसे असली भावनाओं को प्रकट करते हैं। कलम के साथ हम अपनी बातें साझा करते हैं, जैसे कि एक सच्चे साथी से करते हैं। यह हमें सहारा देती है, जब अकेलापन और चुनौतियों का सामना करना होता है। जब कलम हमारी आत्मा के संवेदनशील स्वरूप को छूती है, तो हर शब्द एक समर्पण बन जाता है, एक अद्वितीय कहानी का हिस्सा। हमारी कलम की कहानी एक सहृदय का सफर है, जिसमें विचार और भावनाएं एक दूसरे से मिलती हैं और एक नया अध्याय आरंभ होता है। कलम की खोज में हम अपने आत्मा को खोजते हैं , हमें खुद से मिलवाती है, और एक नए सफर की शुरुआत करती है। यह हमार...

फिर बदलाव आएगा !

तक़दीर बनाने की हिम्मत रखने वाले,  अब जिंदगी की तस्वीर देख रोते है! वह समाज आगे कैसे बढे?  जहाँ लोग जागते हुए सोते है! इलज़ाम लगाकर काम ख़तम समझने वालों,  तुम्हारा हश्र भी वही होगा, बस फर्क इतना होगा की,  इलज़ाम तब कोई और लगा रहा होगा! जागने को भोर का इंतज़ार करने वालो,  इंतज़ार करते रहो, की  कोई सुभाष, कोई भगत,  कोई आज़ाद, फिर खड़ा होगा! तब तक ना जाने, कितने  माँ बहनों की लाशों का बेड़ा होगा! इंतज़ार से  न तक़दीर बदलती हे न ही तदबीर, कुछ बदलना हे तो अपना सोच बदलो  और बदलो अपना तरकीब! एक सरदार उठा, एक गाँधी चला,  तब कारवां बना था! भगत, राजगुरु, ये जमीं जाने  कितनो की खून से सना था!  हौसला रखो, खुद से भी लड़ो,  फिर इंक़लाब आएगा! फिर बदलाव आएगा ! खुद आगे बढ़ो, खुद की लिए लड़ो,  फिर सैलाब आएगा! फिर बदलाव आएगा ! Tumblr पे पढ़िए: https://bit.ly/3xIVQn0 #poetry #poems #poet #shayari

नारी: एक प्यारी सी रचना।

माँ, बहिन, पत्नी, बेटी  नारी तेरे कितने रूप! वरदान है इंसान के लिए, तेरे सारे, सारे स्वरुप।  माँ बनके जन्म दिया, दुनिया का हर कष्ट सहा, बहिन के रूप में दोस्त बनके, जाने कितने नखरे उठाये! पत्नी बनके ईश्वर बना दिया! अपनों से बढ़के प्यार किया, बनके बेटी जो जन्म लिया, हर सुख दुःख में साथ दिया।  रमणी, कामिनी, कान्ता, बनिता जाने कितने नाम हैं तेरे, स्त्री, अबला, औरत, सुंदरी,नारी, जाने क्या क्या संसार पुकारे, तुझ ही से सृष्टि, तुझ ही से विनाश, तू ही न जाने, कितनी शक्तियां तेरे पास! दुनिया में सबसे शोषित,   दलित और उपेक्षित,  फिर भी तू चाहे सबका हित । दो कुलों की तू हितैषी, इसलिए तू दुहिता ! तू शक्ति, तू नारायणी, युगे युगे नारी तू सदा बंदिता। 

इंसानी जिंदगी बड़ी बिचित्र है!

इंसानी जिंदगी बड़ी बिचित्र है, हर पल हर घडी  बदलता यहाँ चित्र है! मौके पे सोता है तक़दीर को रोता है , अक्स बदलता है ऐसे, सूरज से होड़ लगी हो जैसे ! हर स्पर्धा जितना है यहाँ, चाहे रिश्ते नाते छूट जाये! पैसे से तोलता सब कुछ, अपनों का भरोसा चाहे टूट जाये! मोह माया की पट्टी आँखों पे, इज्जत है तार तार! फिर क्यों कीचड़ में उतरे, फिर आँसुओं से धोये बार बार! कर्म को कर बुलंद इतना, खुदा भी बिन मांगे दे! हौशला हो आस्मां की बुलंदी पे, रख भरोसा इतनी खुद पे। 

सोच के देखो !

नफरत का यह सिलसिला, कब तक चलता रहेगा? धरम के नाम से हैवानियत, कब तक यूँ ही चलेगा? ताक़त के गुरुर में मज़हब को, नफरत का जरिया बना दिया,  इंसानियत रंग दी खून में, और  धरती को जंग का मैदान बना दिया! इस मारने, मिटाने के लड़ाई मेँ, कुछ, अपनों को भुला बैठे हैं! धर्म का पट्टी बांध आँखों मेँ, कुछ, रिश्तों से ही ऐंठे हैं! खून की इस होली में, अपनी चलाई गोली में, मानवता ही मर जायेगा ! किस के लिए लड़े यह जंग, सब अपने ही तो मरेंगे,  और तू ने क्या सोचा हे, तू ही जिन्दा बच जायेगा!  सोच, उसके बाद का, क्या नज़ारा होगा!  लाशें ही लाशें हर तरफ, अपनों का बिखरा होगा!  एक चंडाशोक था संसार में,  उसे तो मुक्ति मिल गयी।  मिटा दिया होगा जब संसार, तुम्हे रास्ता कौन दिखायेगा! जिन्दा रह भी गया तो सोच, अकेले धरती पे क्या करेगा! 

नेता और जनता

एक इंसान, दो रूप, एक नेता, जो माने खुद को देवता!  दूजी भोली भाली जनता, जो माने नेता देव स्वरुप! हम(जनता) मुर्ख और तुम मंत्री ! हम अकेले बेचारे और  तुम्हारे सेंकडो जंत्री तंत्री!  हम किस्मत के मारे, और  तुम किस्मत लिखने वाले संत्री! तुम्हारी प्रार्थना, सिर्फ एक दिन,  उसमे भी मैच फिक्सिंग! हम रोज़ करें पूजा, पाठ,  फिर भी रिजेक्ट एप्लीकेशन ! तुम एक बार जीतो, पांच साल का ऐश-ओ-आराम! खूब करो घोटाला, फेलाओ भ्रस्टाचार, फिर भी ताउम्र पेंशन, बिन काम ! हम एक बार जो तुम्हे जिताएं , फिर, जो हमारा जीना हाराम! गलती को रोयें, आँसुओं से धोएं, रोज़ लगाए तुम्हारा ही झंडू बाम! तुम पक्ष में हो या बिपक्ष में, काम से न कोई लेना देना! सत्ता तक पहुँचने की सीढ़ी भी हम,  उसपे तूम क़ुरबान करो हमारी ही जान! गिरगिट बदले रंग, आता मुसीबत देख, नेवले तुम, जो भटकाए सांप का केंचुल फेंक! नर तो तुच्छ है, नारायण भी सोचते होंगे, है भगवान्, क्या बनाया था मैंने, देख क्या बन गया इंसान!

पुलिस का अंतर्मन

जनता के हर बार कि शिकायत है, पुलिस हमेशा देर से आती है ! पर जनता यह नहीं बताती है, की वारदात का, पेहले तो वह खुद मज़ा लेती है, बात जब हद से बढ़ जाये, फिर पुलिस को सूचना देती है।  जनता की शिकायत पे, पुलिस का यह कहना है,  कानून की देवी अंधी है, सबूत उसका नैना है।  वारदात से पहले पहुँच जाए, तो प्रमाण कहाँ मिलना है!  पहुंचने को वक़्त से पहले, संसाधन कहाँ से लाएं? हम तो जनता के बीच कम, दीखते हैं विआईपियों के दाएं बाएं!  एक तो पुलिस में बल कम, नेताओं के सेवा में तोड़ते दम।  एक बार हमे इन नेताओं के  बगल से हटा के देखो! जनता की रक्षा हम करेंगे! बहु बेटियों के दुश्मनो को, चुन चुन के मारेंगे।   न दूसरा कोई निर्भया,अंकिता होगी, न ही कन्हैयालाल होगा ! हर दरिंदे का अंग अंग लाल होगा ! हर जुल्मी को, अपने करनी का मलाल होगा ! इतनी सी छूट देके सरकार देखो,  राम राज्य फिर से बहाल होगा !

सीधी सोच

खुद को हर दिन बेहतर बना रहा हूँ, दूसरों से इसलिए लड़ता नहीं।   दुनियाँ क्या सोचे मेरे बारे में, फ़र्क़ उससे मुझे पड़ता नहीं।  रिश्ते, जरूरी हैं सब मेरे लिए, रिश्तों को अधूरा छोड़ता नहीं।   परेशानियों के इस दौर में, हर शख्स अपनी जंग लड़ रहा! मदद न हो तो न सही,  तमाशबीन बनने का शौक नहीं।   ख़ामोशी को मेरी बेअदबी न समझो, आदतन में यूँ ही,  किसी को परेशान करता नहीं।   उम्मीदें खुद से है, पर  खुदा बनने की ख्वाइश नहीं।  अपेक्षायें होंगी मुझसे बहुतों को, हर आशा का किरण बन सकूँ, यह भी तो मुमकिन नहीं ! #poetry #Kavita #hindikavita #shayari #