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हनुमान जी के बारे में 10 दुर्लभ और सबसे कम ज्ञात तथ्य !

  हनुमान जी के बारे में 10 दुर्लभ और सबसे कम ज्ञात तथ्य ! हनुमान जी, जिन्हें बजरंग बली या अंजनेय के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक पूजनीय देवता हैं, जो भगवान राम के प्रति अपनी भक्ति और महाकाव्य रामायण में अपनी भूमिका के लिए जाने जाते हैं। जबकि कई लोग उनकी अविश्वसनीय ताकत और बहादुरी से परिचित हैं, हनुमान जी के बारे में कई कम ज्ञात और दिलचस्प तथ्य हैं जो उनके बहुमुखी चरित्र और उनकी दिव्यता की गहराई पर प्रकाश डालते हैं। इस लेख में, हम हनुमान जी के बारे में 10 दुर्लभ और सबसे कम ज्ञात तथ्य प्रस्तुत करते हैं जो हर हिंदू को जानना चाहिए। तथ्य 1: हनुमान जी भगवान शिव के अंशावतार हैं हनुमान जी को भगवान शिव का अंशावतार या आंशिक अवतार माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी मां अंजना एक अप्सरा थीं जिन्हें वानर बनने का श्राप मिला था। जब उसने एक बच्चे के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की, तो उन्होंने उसकी इच्छा पूरी की और उसे हनुमान जी का आशीर्वाद दिया। तथ्य 2: हनुमान जी चिरंजीवी हैं चिरंजीवी हिंदू धर्म में एक अमर प्राणी हैं, और हनुमान जी उनमें से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि उनकी अटूट...

सूर्यदेव: आकाश के राजा की कहानी और उनके 10 शक्तिशाली मंत्र।

  सूर्यदेव, भारतीय वेद-पुराणिक साहित्य में देवताओं के राजा के रूप में पूजे जाने वाले एक महत्त्वपूर्ण देवता हैं। वे सबके जीवन को प्रकाशमय बनाने के लिए पौराणिक कहानियों और उनके मंत्रों के माध्यम से जाने जाते हैं। इस लेख में, हम सूर्यदेव की कहानी के साथ उनके 10 प्रमुख मंत्रों को जानेंगे। 1. सूर्यदेव की कहानी: सूर्यदेव को सूर्यपुत्र, सविता, आदित्य, भानु, रवि, विवस्वान आदि नामों से भी जाना जाता हैं। उन्हें दिन के भगवान के रूप में पूजा जाता है जो हमें ऊर्जा, प्रकाश, और जीवन देते हैं। उनकी कहानियां पुराणों में विविध रूप से मिलती हैं, जो हमें उनके महत्त्व का साक्षात्कार कराती हैं। 2. सूर्यदेव के 10 मंत्र: ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:। प्रातः के समय उठकर, उत्तर दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का 108 बार जाप करें। ओम खकोलकयै विद्महे पाशबाणाय धीमहि। तन्नो आदित्य: प्रचोदयात्। संध्या के समय, पश्चिम दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का 108 बार जाप करें। ओम नमो भागवते रवये मृत्यवे चास्वाहा। रात्रि के समय, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का 108 बार जाप करें। ओम ह्रीं ह्रां ह्रौं स: सूर्याय नम:...