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फिर बदलाव आएगा !

तक़दीर बनाने की हिम्मत रखने वाले, 

अब जिंदगी की तस्वीर देख रोते है!

वह समाज आगे कैसे बढे? 

जहाँ लोग जागते हुए सोते है!

इलज़ाम लगाकर काम ख़तम समझने वालों, 

तुम्हारा हश्र भी वही होगा,

बस फर्क इतना होगा की, 

इलज़ाम तब कोई और लगा रहा होगा!

जागने को भोर का इंतज़ार करने वालो, 

इंतज़ार करते रहो, की 

कोई सुभाष, कोई भगत, 

कोई आज़ाद, फिर खड़ा होगा!

तब तक ना जाने, कितने 

माँ बहनों की लाशों का बेड़ा होगा!

इंतज़ार से 

न तक़दीर बदलती हे न ही तदबीर,

कुछ बदलना हे तो अपना सोच बदलो 

और बदलो अपना तरकीब!

एक सरदार उठा, एक गाँधी चला, 

तब कारवां बना था!

भगत, राजगुरु, ये जमीं जाने 

कितनो की खून से सना था! 

हौसला रखो, खुद से भी लड़ो, 

फिर इंक़लाब आएगा!

फिर बदलाव आएगा !

खुद आगे बढ़ो, खुद की लिए लड़ो, 

फिर सैलाब आएगा!

फिर बदलाव आएगा !

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