सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

उम्मीदों की शाम



उम्मीदों की शाम **************** सोमवार की शाम कुछ थकी-थकी सी है, 🌆 रात की चादर में सिमटी हुई सी है, 🌙 दिनभर की दौड़ में उलझे हुए हैं हम, 🏃‍♂️ पर उम्मीदों की लौ अब भी जली हुई सी है। 🔥 शहर की रौशनी में हल्की खामोशी है, 🌃 दिल में कहीं थोड़ी सी बेकरारी सी है, 💔 सपने जो सुबह के संग देखे थे हमने, 🌅 वो अब भी निगाहों में जागी हुई सी है। 👀 शाम की ठंडक में सुकून थोड़ा है, 🌌 कल की सुबह का ख्याल अभी ज़िंदा है, 🌄 सोचते हैं कि थकान मिटा लें आज की, 🛋️ क्योंकि हर दिन के साथ एक नया सपना है। ✨ शुभ संध्या💐 #शुभ_संध्या #GoodEvening

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जाति जनगणना: भारत के लिए कितना जरूरी कदम?

जाति सदियों से भारत के सामाजिक ताने-बाने का एक अभिन्न अंग रही है, जो सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता, राजनीतिक समीकरणों और सार्वजनिक नीतियों को गहराई से प्रभावित करती रही है। हाल के वर्षों में, जाति जनगणना कराने पर बहस ने गति पकड़ ली है, विभिन्न राजनीतिक दल, विशेषकर कांग्रेस, इसकी वकालत कर रहे हैं। यह लेख भारत में जाति जनगणना की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है, इसके फायदे और नुकसान की खोज करता है, और कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए राजनीतिक निहितार्थों की जांच करता है। जाति जनगणना क्या है? जाति जनगणना में जनसंख्या की जाति संरचना पर डेटा एकत्र करना शामिल है। अंतिम जाति-आधारित डेटा संग्रह 1931 में किया गया था। नए सिरे से जाति जनगणना की मांग बढ़ रही है, समर्थकों का तर्क है कि यह विभिन्न जातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर प्रदान करेगा, अधिक प्रभावी नीति निर्माण में मदद करेगा और कार्यान्वयन। जाति जनगणना के फायदे ! नीति निर्माण के लिए सटीक डेटा: एक जाति जनगणना विभिन्न जातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर सटीक डेटा प्रदान कर सकती है। इससे समाज के सबसे वंचित वर्गों को अधिक प्रभावी ढंग से ल...

राजस्थान दिवस: वीरता और विरासत की भूमि को श्रद्धांजलि !

  राजस्थान दिवस पर, हम इस जीवंत भारतीय राज्य के समृद्ध इतिहास, संस्कृति और विरासत का जश्न मनाते हैं। राजस्थान, जिसे "राजाओं की भूमि" के रूप में जाना जाता है, इतिहास में डूबा हुआ एक क्षेत्र है, जिसकी विरासत हजारों साल पुरानी है। इस लेख में, हम राजस्थान की दिलचस्प कहानी, इसकी स्थापना और मुगल काल से लेकर भारत की स्वतंत्रता और उससे आगे की भूमिका तक का पता लगाएंगे। राजस्थान की स्थापना 30 मार्च 1949 को भारत गणराज्य के एक राज्य के रूप में की गई थी। राज्य का गठन पूर्व राजपूताना एजेंसी और अजमेर-मेरवाड़ा क्षेत्र सहित 22 रियासतों और क्षेत्रों को मिलाकर किया गया था। "राजस्थान" नाम का अर्थ है "राजाओं की भूमि", जो विभिन्न राजपूत राजवंशों द्वारा शासित राज्यों के संग्रह के रूप में क्षेत्र के इतिहास को दर्शाता है। मुगल काल के दौरान, राजस्थान अपनी सामरिक स्थिति और संसाधनों के कारण एक महत्वपूर्ण क्षेत्र था। अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ जैसे सम्राटों के नेतृत्व में मुगल साम्राज्य का इस क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। ये शासक कला, वास्तुकला और साहित्य के संरक्षण के लिए जाने जा...

दुनिया के आईने में – एक शायर 🌙🖤

हर दिल की दास्ताँ हर शख्स को दिखानी नहीं, कुछ जज़्बात ऐसे हैं जो बयान की जानी नहीं। मत बनो वो दस्तावेज़, जिसे सब पढ़ जाएँ, जहालत के दौर में हर पन्ना फाड़ जाएँ। जब फ़ायदों की फ़सल थी, हर कोई साथ था, काम खत्म होते ही, सब चेहरे बदल गए। मोहब्बत को तौलते हैं वो बंदे ज़माने वाले, नफ़ा-नुक़सान की नज़र से देखते हैं खामोश क़िस्से। ज़ख़्म वही देते हैं, जो हँस के थाम लेते हैं हाथ, मोहब्बत की क़ीमत कभी नहीं समझ पाते साथ। रिश्तों की दुकान लगी है, इंसानियत कहीं खो गई, सुकून की तलाश में, खुद से दूर हो गया । चुप्पी को सँवारो अपनी सबसे बड़ी ताक़त बना, हर शोर में छुपा है कोई ग़म, कोई कहानी अधूरी। खुली किताब न बनो, हर किसी के लिए यहाँ, इस अंधेरे सफ़र में, सिर्फ़ वो जलते हैं जो समझें। — ✍️ आशुतोष पाणिग्राही।