सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

माँ तो माँ ही होती है।

 सुबह सुबह कुछ अवसाद-सा था,

कुछ सुस्त था तन।

था कुछ उदास-सा मन,

सोच रहा था कुछ बेखयाली में,

जाने कहाँ था मगन!

फ़ोन की घंटी बजी, लगा,

माँ का कॉल आया होगा।

फ़ोन उठाते ही महसूस हुआ,

मेरी खामोशी सुन ली थी उसने,

फिर प्यारी-सी आवाज़ आयी,

और हाल चाल पूछने लगी।

सवाल अलग-अलग थे, पर

जवाब एक ही सुनना चाहती थी!

जैसे भनक लग गयी थी

उसे मेरे परेशानियों की!

और पक्का करना चाहती थी,

की बेटा सही सलामत है।

में कहता रहा, में ठीक हूँ,

उसके हाल चाल पूछना चाहा,

पर सवाल उसके और मेरा जवाब,

ख़त्म ही न हो रहा!

बात करके माँ से,

मन मेरा हल्का हो गया था,

पर एक सवाल भगवान से था।

मेरे परेशानियों का एहसास,

उसको हर बार कैसे हो जाती हे!

सवाल ध्यान से सुन कर,

भगवान् ने भी बोला,

माँ तो माँ ही होती है।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उम्मीदों की शाम

उम्मीदों की शाम **************** सोमवार की शाम कुछ थकी-थकी सी है, रात की चादर में सिमटी हुई सी है, दिनभर की दौड़ में उलझे हुए हैं हम, पर उम्मीदों की लौ अब भी जली हुई सी है। शहर की रौशनी में हल्की खामोशी है, दिल में कहीं थोड़ी सी बेकरारी सी है, सपने जो सुबह के संग देखे थे हमने, वो अब भी निगाहों में जागी हुई सी है। शाम की ठंडक में सुकून थोड़ा है, कल की सुबह का ख्याल अभी ज़िंदा है, सोचते हैं कि थकान मिटा लें आज की, क्योंकि हर दिन के साथ एक नया सपना है। शुभ संध्या #शुभ_संध्या #GoodEvening

राजा नल: आधुनिक राजनीति में धोखे और पुनरुत्थान की कहानी

  महाभारत के विशाल और प्राचीन महाकाव्य में, एक कम-ज्ञात कहानी मौजूद है जो आधुनिक भारत के राजनीतिक परिदृश्य से काफी मिलती जुलती है। यह राजा नल की कहानी है, जो अपने ज्ञान और न्यायपूर्ण शासन के लिए प्रसिद्ध शासक थे, जिनकी छल और मोक्ष की यात्रा समकालीन राजनीति पर एक मार्मिक प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है। राजा नल को अपने भाई, पुष्कर के रूप में एक विकट चुनौती का सामना करना पड़ा, जिसके मन में सिंहासन की गहरी इच्छा थी। पुष्कर ने चालाकी से नल को पासे के खेल में चुनौती दी, एक ऐसी प्रतियोगिता जो राज्य के भाग्य का निर्धारण करेगी। खेल की अनुचितता के बावजूद, नल ने अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखते हुए चुनौती स्वीकार कर ली। आधुनिक राजनीति की तरह, पासे का खेल भी छल और चालाकी से भरा हुआ था। बेईमान रणनीति की सहायता से, पुष्कर विजयी हुआ, उसने नल से उसका राज्य, धन और यहाँ तक कि उसकी प्यारी पत्नी, रानी दमयंती भी छीन ली। बेसहारा और अकेला छोड़ दिया गया, नल जंगलों में भटकता रहा, अपने नुकसान से जूझता रहा और अपने अगले कदमों पर विचार करता रहा। अपने सबसे बुरे समय में, नल का असली चरित्र चमक उठा। अपनी पीड़ा के बावजूद...

शिव जी: आदियोगी, अंतर्यामी, अनंत शक्तिशाली

हमारे संसार में एक ऐसे देवता हैं , जिनका नाम सुनते ही मन और आत्मा में शांति का आभास होता है - भगवान शिव। अवश्य रूप से , शिव जी हमारे साकार और निराकार जगत के परम शक्तिमान हैं। भगवान शिव , त्रिकलाध्यक्ष , आदि देव , भूतनाथ , भूतेश , रुद्र - ये सभी नाम एक ऐसे देवता के हैं जिन्होंने सृष्टि की रचना के लिए अपना शक्तिशाली रूप धारण किया।   इस ब्लॉग में , हम इस अद्वितीय और प्रिय देवता की महिमा को जानेंगे , उनके किस्से सुनेंगे , उनके विभिन्न नामों को समझेंगे , उनके पूजन स्थलों का विवेचन करेंगे , उनके अवतारों की चर्चा करेंगे और उनके महत्वपूर्ण स्थलों को समझेंगे। शिव  जी  की कहानी और उनके नामों का विवरण: भगवान शिव की कहानी अत्यंत रोमांचक और रहस्यमयी है। वे अनंत और अच्युत हैं, जो सृष्टि का पालन-पोषण करने का धर्म निभाते हैं। शिव ने गंगा को अपने जटाओं में समेटा ताकि धरती पर उसका आविर्भाव हो सके। इस रूप में, शिव ने धरती पर वास किया और अपने भक्तों की रक्षा की।  संसार में उनके अनगिनत  नाम हैं।...